चलें जहाँ प्रकाश हो
अशमन्जस से भरा ये मन,पैमानों से डरा ये मन,
पुलकित जीवन की आस में,
कितनें दुख से भरा ये मन
विराट हो, प्रपात हो, मन मेरा आकाश हो
चलें जहाँ प्रकाश हो। ....
इतराता हूँ , पछताता हूँ,
गलती वही दोहराता हूँ,
जादू की बस्ती के भीतर,
हाथ में नहीं कुछ पाता हूँ,
एकांक हो, प्रगाढ हो, आकांक्षाओं का सारांश हो,
चलें जहाँ प्रकाश हो। ....
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